यह उपाय करके आसानी से बचा सकते है, धान की फसल को बोना रोग से, होगा उत्पादन में फायदा

आज पंजाब हरियाणा उत्तराखंड जैसे कहीं राज्यों में धान की फसल काफी ज्यादा मात्रा में की जाती है, लेकिन कई बार देखा गया है कि, सदन राइस ब्लैक वायरस स्पेशल को नुकसान पहुंचता है, जिसकी वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

ब्लैक-स्ट्रीक्डड्वार्फ वायरस का असर

इस बीमारी से 20 से 30 दिन बाद ही धान के पौधे छोटा रह जाते हैं और इसका उत्पादन होना सीधा असर पढ़ने लगता है। किसान की इस समस्याओं के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा एक सूचना जारी की गई है, उन्होंने बताया है कि, आप इस वायरस से फसल को बचा सकते हैं। धान की फसल में पिछले साल आज बीमारी के कारण पौधे काफी छोटे रह गए थे और उनकी संख्या अलग-अलग किस्म से लेकर 20% तक की कमी पाई गई थी।

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यह एक ऐसा वायरस है जो की, एक पौधे से दूसरे पौधे में फैला है। तेल या चेपा जिसे हम विशेष रूप से व्हाइट ब्लैक कॉपर कहते हैं, यह सफेद रंग का कट होता है। इसकी पीठ पर सफेद रंग के धब्बे पाए जाते हैं, बाकी इसका रंग बड़ा नजर आता है। यह वायरस ग्रसित पौधे का रस किसी स्वास्थ्य पौधे पर जाता है तो, उसमें भी वायरस फैला देता है। 25 से 30 दिन की फसल पर इसका प्रकोप अधिक देखा जाता है

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इस तरह से करे बचाव

वही वैज्ञानिकों के अनुसार इस खास किस्म के कीट या तेला , चेपा की रोकथाम के लिए डाइनोटफ्यूरान 20 एसजी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर या ट्राईफ्लुओपाइरम 10 एससी 235 मिली प्रति हेक्टेयर या फिर पाइमेट्रोजिन 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से इसका छिड़काव करना चाहिए। पौधों की जड़ों के पास पेक्सालॉन दवा 94 मि ली 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में छिड़काव कारगर होता है।

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