किसान इस विदेशी फल की खेती से लाखों की कमाई कर सकते है, जानें कैसे होती है, इसकी खेती

इस समय किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए पारंपरिक खेती को छोड़कर कई और फसलों पर भी काफी ध्यान देने लग गए हैं. वैसे में कई ऐसे फल है जो कि, विदेशों में फैला हुआ जाते थे, लेकिन आज देश में इनका काफी अच्छा खासा उत्पादन होता है और आज कई किसान इससे काफी अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं.

आपको बता दे की एवोकाडो भी एक ऐसा ही फल है जो की, दुनिया के अधिकांश लैटिन अमेरिकी देशों में इसकी खेती की जाती थी. इस फल के स्वास्थ्य लाभ भी बहुत सारे हैं, उसकी मांगा दुनिया भर में देखी जाती है. वही एवोकाडो को आज भारत में भी काफी ज्यादा उगाया जा रहा है.

एवोकाडो के फायदे

यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ है, जिसकी उत्पत्ति मेक्सिको और मध्य भारत में हुई थी. यह पौष्टिक फल के रूप में जाना जाता है, जिसमें गुड़ा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और उसमें प्रोटीन वसा और कार्बोहाइड्रेट कम पाया जाता है इसमें पाए जाने वाला जैतून तेल की संरचना के समान. इसके साथ ही आप फल दो खनिज घटक को आयरन और तांबा इसमें भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसके साथ एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम भी इसमें काफी अच्छी मात्रा में होते हैं, जिसके लिए यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है और इसकी आज मांग भी बढ़ते हुए देखी जा सकती है.

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मिट्टी और जलवायु

भारत में एवोकाडो तमिलनाडु, केरल जैसे दक्षिणी उष्णकटिबंधीय राज्यों में उगाया जाता है। कर्नाटक, और महाराष्ट्र, यह पूर्वोत्तर हिमालयी राज्य सिक्किम की पहाड़ियों पर भी यह लगाया जाता है. यह उत्तरी भारत की गर्म शुष्क हवाओं और पाले को सहन नहीं कर सकता, इसलिए आमतौर पर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है।

एवोकाडो के पौधे 5-6 साल में फल देने लगते हैं, जबकि वानस्पतिक तरीके से उगाए गए पौधे 3-4 साल में फल देने लगते हैं। इसके फल कटाई के 8-10 दिन बाद पकते हैं। एक पेड़ से 400-500 फल तोड़े जाते हैं, और यह बाजार में 300 से 500 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। एसे में किसान प्रति एकड़ 6 लाख तक की कमाई सालाना कर सकता है।

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