राजस्थान में ग्वार की खेती : ग्वार की खेती से भी हो सकती है सालाना करोड़ो की कमाई

भारत में विश्व में सबसे ज्यादा ग्वार उत्पाद होता है! जिसमे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र में ग्वार की खेती होती है! भारत में सभी राज्य के मुकाबले में राजस्थान में करीब 80% राजस्थान उत्पात करता है! भारत विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक देश है जो विश्व का 80% उत्पादन भारत करता है! भारत में सबसे ज्यादा ग्वार की खेती राजस्थान करता है! ग्वार गर्मियों के मोषम की फसल मन जाती है! राजस्थान में ग्वार को ज्यादा बाजरे, मोठ के साथ बोया जाता है! ग्वार फसल के साथ-साथ सब्जियों में भी गिना जाता है! ग्वार की खेती से किसान सालाना लाखो रूपये की कमाई की जा सकती है! ग्वार की खेती भारत के कुछ क्षेत्र जैसे राजस्थान, हरियाणा, उतरप्रदेश ,मध्यप्रदेश पर महाराष्ट्र की जाती है! राजस्थान में 75% क्षेत्र के ग्वार की फसल बोई जाता है!

ग्वार की खेती का लाभ

राजस्थान के कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार पशु को ग्वार खिलाने से ताकत और तादुर्स्ती आ जाती है! दूध देने वाले पशुओ के दूध में वृद्धि होती है! ग्वार की फसल के दोहरान ग्वार फ,फली से सब्जिया भी बनाई जाता है! ग्वार की खेती से गोंद का निर्माण भी किया जाता है! ग्वार का ज्यादा उपयोग ग्वार गम के निर्माण के लिया जाता है! ग्वार के इस्तेमाल दाल और सूप बनाने में भी किया जाता है. राजस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में यह काफी लोकप्रिय फसल है!

राजस्थान में ग्वार की खेती
ग्वार की खेती

जलवायु और भूमि

ग्वार एक उष्णकटिबंधीय फसल है जो 18 से 30 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान पर पकती है। खरीफ की गर्म और आर्द्र जलवायु के कारण पेड़ों की वृद्धि अच्छी होती है। शीतकाल में इन फसलों की खेती लाभदायक नहीं होती है। यह फसल सभी प्रकार की मिट्टी में उगाई जाती है। अच्छी जल निकासी वाली मध्यम से भारी मिट्टी में फसल अच्छी मानी जाती है। यदि मिट्टी की सतह 6 से 8 के बीच हो तो फसल अच्छी तरह से विकसित होती है

ग्वार की खेती करने का मौसम

ग्वार की खेती करने के लिए सही मौसम गर्मियों का होता है। ग्वार एक गर्मियों की फसल है जो ज्यादातर मध्य और उत्तरी भारत में उगाई जाती है। ग्वार की बीजे बोने का समय मार्च या अप्रैल के महीने में होता है और इसे जुलाई या अगस्त में काटा जाता है। ग्वार की उन्नत तकनीकों का उपयोग करके, इसे साल भर में भी उगाया जा सकता है, लेकिन गर्मियों में उत्तर भारत में उगाई जाने वाली ग्वार की फसल सबसे अच्छी होती है।

राजस्थान के कुछ क्षेत्र में जुलाई और अगस्त में बोने जाने वाली भी फसल है! अक्टूबर और नवंबर में कटाई की जाती है! राजस्थान के किसान ज्यादा वर्षा के समय ग्वार की फसल बोई जाती है! राजस्थान में किसान वर्षा के ऊपर निर्भर करता है!

ग्वार में उर्वरक और पानी का प्रयोग

ग्वार की उन्नत खेती के लिए उर्वरक और पानी का उचित प्रयोग आवश्यक होता है।

उर्वरक की बात करें तो, ग्वार की फसल के लिए उपयुक्त उर्वरक निम्नलिखित हैं:

  1. देशी गोबर का खाद: इसे ग्वार की खेती में उपयोग किया जाता है। यह खाद ग्वार के पौधों को पोषण देता है और उन्हें स्वस्थ रखता है।
  2. नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम सहित रसायन खाद: यह उर्वरक ग्वार की उत्पादकता बढ़ाता है और पौधों को आवश्यक पोषण प्रदान करता है।

बात करें पानी की, तो ग्वार की खेती के लिए निम्नलिखित मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है:

  1. सोखा हुआ माटी: ग्वार की फसल को सोखे माटी में उगाया जाना चाहिए, जहां पानी अच्छी तरह से संचयित हो सकता है।
  2. सिंचाई: ग्वार की खेती में सिंचाई का उचित व्यवस्था करना आवश्यक होता है। फसल को उन्नत बनाने के लिए, ग्वार को पानी की आवश्यकता अधिकतम 45 सेमी गहराई तक होती है।

ग्वार की उन्नत किस्में

ग्वार की उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

  • पूजा ग्वार- यह किस्म खेती में सबसे ज्यादा उत्पादकता देने वाली होती है। यह उत्तर भारत में अधिक फसली उत्पादन के लिए उचित होती है।
  • गंगा ग्वार- यह किस्म सबसे अधिक मात्रा में नाइट्रोजन संश्लेषण करती है और उत्तर भारत में खेती के लिए अधिक उपयुक्त होती है।
  • राजस्थानी ग्वार- यह किस्म राजस्थान में खेती के लिए अधिक उपयुक्त होती है। इसमें उत्तर भारत के ग्वार की तुलना में कम मात्रा में नाइट्रोजन संश्लेषण होता है।
  • चारा ग्वार- यह किस्म मुख्य रूप से चारे के लिए उगाई जाती है और यह बहुत तेजी से उगती है।

यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है कि किसी विशेष क्षेत्र में कौन सी ग्वार की किस्म सबसे उपयुक्त होगी, इस बारे में एक अधिकारी से परामर्श लेना उचित होगा।

ग्वार फसल को कीट और रोग से बचाने के उपाय

ग्वार फसल को कीट और रोग से बचाने के उपाय निम्नलिखित हैं:

  1. बीज उपचार: ग्वार के बीज को निम्नलिखित उपायों से उपचार किया जा सकता है:
  • बीजों को दूध या छाछ में भिगो दें।
  • नीम का पानी या नीम का तेल बीजों पर छिड़कने से पहले इस्तेमाल करें।
  1. कीटनाशक उपयोग: कीटनाशकों को सावधानीपूर्वक उपयोग करें। इन्हें खेत में बरतने के लिए उचित ढंग से भी रखा जाना चाहिए।
  2. जल संरचना: ग्वार की उचित जल संरचना के बिना फसल में दिक्कत हो सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ग्वार के रूप में उगाई गई फसल को सही मात्रा में पानी मिलता है, नियमित रूप से जल संरचना दें।
  3. फसल के बीच छोटी छोटी खाई बनाएं: ग्वार के बीच छोटी छोटी खाई बनाने से कीटों और रोगों का प्रसार कम होता है।
  4. समय पर फसल काटें: ग्वार फसल को समय पर काटा जाना चाहिए। इससे फसल के बीमारियों का प्रसार रोका जा सकता है।

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