यदि किसान आलू की खेती के लिए अपनाएं यह तरीका, तो होगी खेत में बंपर आवक, कमाई होगी चार गुना, देखे तरीका

सब्जियों के रूप में आलू सबसे ज्यादा खाया जाता है और आलू सदाबहार सब्जियों में भी गिना जाता है जो कि, हर घर में आपको देखने को मिले जाएगी। साथ ही किसान इसकी खेती करके काफी अच्छा मुनाफा भी कमाते हुए नजर आ रही हैं।

सहफसली तरीका

आज हम आपको कुछ ऐसा ही तरीका बताने वाले हैं, जिसके माध्यम से किसान इन तरीकों को अपनाकर आलू की खेती में बंपर आवक कर अपनी आर्थिक स्थिति और मजबूत कर सकता है। देश में उत्तर प्रदेश का कन्नौज जिला आलू की खेती के लिए काफी प्रसिद्ध है और यहां के लगभग सभी किसान आलू की खेती करते हुए नजर आ जाएंगे और अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं।

यहां के किसान आलू के बेहतर उत्पादन के लिए सहफसली तरीके से खेती करते हैं। आपको बता दे कि, इससे आलू के पौधों को अधिक सुरक्षा मिल जाती है और उनका उत्पादन भी बढ़ जाता है। इस तरीके से खेती करने पर खेतों में आलू की ज्यादा पैदावार होने लगती है, जिससे कि और अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

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सहफसली खेती करने का एक अलग ही तरीका होता है, इसमें दो फासले यानी मुख्य फसल और एक ऐसी फसल की खेती एक साथ की जाती है, खेती करते समय एक ही किस्म की फसल की बुवाई नहीं कर सकते हैं और इन दोनों फसलों का पोषक तत्व ग्रहण का स्तर अलग-अलग होता है। इससे की एक फसल की छाया दूसरी फसल पर बिल्कुल भी नहीं पढ़नी चाहिए।

सहफसली में इन फसल को लगाये

यदि आप आलू की फसल को लगाना चाह रहे हैं और उसके साथ एक और फसल को लगाना चाह रहे हैं तो, इसके लिए आप नींबू, कद्दू, लौकी, जैसी फसलों का चुनाव कर सकते हैं। यह सभी आलू की साफ फसल कहलाती है इसमें आलू की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

साथ ही सर्दियों में आलू की फसल पर पाला पड़ने का खतरा भी काफी कम हो जाता है। ऐसे में सब असली पौधों के पत्तों से आलू को सर्दी से बचाया जाएगा, जिससे कि आलू खराब नहीं होता है और ज्यादा से ज्यादा बंपर पैदावार देता है।

सर्दियों के मौसम में कोहरा पड़ने के कारण आलू की फसल में झुलसा जैसे रोग लग जाते हैं। ऐसे में किसान इस रोग से निजात पाने के लिए रीडोमील एमजेड-78 नामक दवा को दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़काव कर सकते हैं। 

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