गिरनार मूंगफली: तेल की मात्रा ज्यादा, कम सिंचाई और सिमित समय में बम्फर पैदावार

भारतीय के किसानो के चहरे पर इस वर्ष खुसी देखने को मिल सकती है! लम्बे समय का इंतजार ख़तम हो गया है! भारत में कई सालों की मेहनत के बाद विज्ञानिको ने राजस्थान के वातावरण और मिट्टी के अनुकूल ज्यादा तेलीय मूंगफली के बीज तैयार करने में सफलता प्राप्त कर ली है।

बीकानेर की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में काफी टीमें बाद किसानो के लिए ज्यादा मार्जन देने वाली मुगफली का बिज मिलेगा! विज्ञानिको ने जिस नयी मुगफली आ उत्पाद किया है उसका नाम गिरनार रखा गया है! गिरनार मूंगफली का सफल परीक्षण भी कर लिया गया है!

गिरनार मूंगफली जो तेल के लिए बजाने वाली मुगफली है, यह सामान्य से तिन से पांच गुना अधिक पैदावार होगा! जिससे किसानो के उत्पादन भी ज्यादा होगा, किसान को कर्ज से मुक्त करने में सफल हो सकती है! इतने वर्ष तक किसान पुराणी तेल वाली मुगफली की बुआई करते थे! लेकिन अभी पांच गुना ज्यादा पैदावार देने वाली मुगफली मार्किट में आ गयी है! यह बिज राजस्थान के वातावरण के आधार पर तेयार किया गया है! जिसमे कम सिचाई के साथ-साथ कम समय में पक जाती है!

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मूंगफली की किस्में

मूंगफली विज्ञानिको अनुसंधान के अनुसार राजस्थान में मूंगफली की पंद्रह किस्में हैं। जानकारी के अभाव में किसान 1970 से 90 के दशक में जारी मूंगफली की 10-12 किस्में बोते हैं। निदेशालय ने ट्रेंडिंग वेरायटी पर रिसर्च कर गिरनार की 4-5 वैरायटी तैयार की है। इसमें हाइड्रोलिक एसिड की मात्रा 70 से 80 फीसदी होती है। इससे गोटा में तेल की मात्रा 53 प्रतिशत से अधिक रहती है. जबकि मूंगफली की अन्य किस्मों में 48 से 50 प्रतिशत तेल निकलता है. मूंगफली की कुछ किस्में हैं। ये हैं:

  1. बासुदा जैसी मूंगफली – यह बहुत छोटी होती है और सूखे कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता रखती है।
  2. चारखाने जैसी मूंगफली – यह दो बार तकसाली वाली होती है और बड़ी होती है।
  3. कौल जैसी मूंगफली – यह भी दो बार तकसाली वाली होती है, लेकिन चारखाने जैसी मूंगफली से थोड़ी छोटी होती है।
  4. अमेरिकी मूंगफली – यह बड़ी होती है और आमतौर पर नमकीन होती है।
  5. शाही मूंगफली – यह बहुत बड़ी होती है और अधिकतर उत्तर भारत में पाई जाती है।

गिरनार मूंगफली कम समय में पककर तैयार

जो मुगफली अभी प्रचनल में है वह 140 दिन के लगभग तेयार होती है! और इसमें ज्यादा सिचाई की आवश्यकता होती है! और जो गिरनार मूंगफली है वह 110 दिनों में तेयार हो जाती है! प्रचलन में चल रही किस्मों के मुकाबले कम सिंचाई की आवश्यकता रहती है। निदेशक डॉ. एसके बेरा ने अनुसंधान कर इसे तैयार किया है।

गिरनार मूंगफली से फायदा

किसानों अब 1970 से 1990 वर्ष की किस्म की मूंगफली को छोड़कर नई किस्म गिरनार मूंगफली 4-5 की बुवाई कर सकेंगे। इस किस्म में तेल की मात्रा ज्यादा होती है। सिंचाई भी कम कर सकते है! वजन ज्यादा और तेल ज्यादा होने से किसानो को ज्यादा आमदनी भी अच्छे मिलेंगे।- डॉ. नरेन्द्र कुमार, प्रभारी अधिकारी मूंगफली क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र

गिरनार मूंगफली खाने से कई फायदे होते हैं। इसके कुछ फायदे निम्नलिखित हैं:

  1. गिरनार मूंगफली में विटामिन ई, थायमिन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और कई अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
  2. गिरनार मूंगफली में विटामिन बी का अच्छा स्रोत होता है, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है।
  3. इसका सेवन खून को साफ करने में मदद करता है जिससे शरीर में जमा हुए तैल और अन्य अवशिष्ट पदार्थों को दूर करता है।
  4. इसमें प्रोटीन की अधिक मात्रा होती है, जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण होता है।
  5. इसके सेवन से शरीर की पोषण शक्ति बढ़ती है जो रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।
  6. गिरनार मूंगफली में अंटीऑक्सीडेंट पाये जाते हैं, जो शरीर को कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
  7. इसका सेवन नियमित रूप से किया जाने से हड्डियों की मजबूती बढ़ती है।

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