सरकार के नए निर्णय से गेहूं उत्पादक किसानो को सर्वाधिक नुकसान

देर से ही सही, किंतु सरकार के नए निर्णय ने पूरे देश की आटा मिलें, उपभोक्ता एवं किसानों को हिलाकर रख दिया है। नए निर्णय के अनुसार दिसंबर 2023 पूरे देश में गेहूं 2125 एवं 2150 रुपए क्विंटल में मिलेगा और आटा – मैदा एवं बेकरी उत्पाद कमोबेश एक मूल्य पर बिकेंगे। हालांकि इस नीति से खाद्य निगम को करोड़ों रुपए का घाटा होगा, किंतु चुनावी वर्ष में सभी कुछ जायज है। पिछले 4-5 माह पूर्व गेहूं 2400 रुपए क्विंटल बिक रहा था, तेज गति से बढ़कर 3000 से 3250 रुपए के स्तर पर पहुंच गया। सरकार मौन धारण करके बैठी रही।

गेहूं की इस महंगाई ने करोड़ों जनता को हिलाकर रख दिया था। इससे सरकार की साख भी प्रभावित हुई है, चाहे सरकार माने या न माने। दूसरी ओर पूरे देश में एक मूल्य पर गेहूं बेचने का खामियाजा गेहूं उत्पादक किसानों को उठाने पड़ेगा। उत्पादक 3000 से 3250 रुपए गेहूं बेचने का सपना देख रहे थे, अब मूर्छित अवस्था में ला दिया है।

सरकार के नए निर्णय से किसानो को नुकसान

केंद्र सरकार ने गेहं बिक्री का हाल ही में जो निर्णय लिया है वह करोड़ों लोगों के लिए लाभदायक है और स्वागत योग्य भी है, किंतु इस निर्णय से किसानों की कमर पूरी तरह से टूट जाएगी। जो अभी तक महंगा गेहूं बेचकर करोड़ पति बनने का सपना देख रहे थे। वह सपना चूर – चूर हो गया है। पूरे देश में मार्च तक 2125 से 2150 रुपए में गेहूं बिक्री की जाएगी। गत वर्ष फसल शुरू होते ही निर्यात खोलने से मध्यप्रदेश के किसानों का बड़ी मात्रा में गेहूं विदेश चला गया था। इस वर्ष विदेश जाने का तो सवाल ही नहीं है, वरन् अन्य राज्यों में जाने के लिए भी तरस सकता है।

रणनीति के पीछे राज

इस रणनीति के पीछे यह राज हो सकता है कि किसान अधिकतम गेहूं खाद्य निगम को तौले। जिससे केंद्रीय पूल के भंडार भर सके। इस वर्ष तो लगभग सभी गोदाम खाली हो गए हैं। मार्च अंत तक सरकारी भंडार का जितना भी माल है, वह भी खाली हो जाएगा। इसकी प्रमुख वजह यह है सभी राज्यों में एक समान भाव पर बिकवाने की पूर्व वर्षों में यह प्रणाली अपनाई गई थी।

सरकार के नए निर्णय से अन्य उत्पादों पर फर्क

यह सही है कि इस प्रणाली से पूरे देश में आटा, ब्रेड, बिस्किट एवं बेकरी आयटम में अधिक फर्क नहीं रहेगा, वरन् गेहूं उत्पादक राज्यों की अपेक्षा सस्ते बिक सकते हैं। वास्तव में मंदी की लहर उपरोक्त राज्यों में आना मानी जाएगी और उत्पादक राज्यों को बड़ा झटका। पिछले सप्ताह अधिकांश मिलों ने 7 दिन में उपयोग लायक गेहूं के टेंडर भरे थे। आटा मिलों का यह आशंका थी कि सरकार टेंडर में बिक्री भाव घटा सकती है। इस बार मिलें भरपूर मात्रा में गेहूं की खरीदी करें, क्योंकि इससे कम मूल्य पर गेहूं मिलने वाला नहीं है।

निर्णय कब लागु होगा

अखिल भारतीय स्तर पर का मूल्य एफएक्यू क्वालिटी 2350 से घटाकर 2150 रुपए एवं यूआरएस क्वालिटी 2125 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। सर्वाधिक उल्लेखनीय है कि इन्हीं मूल्य पर राज्य सरकारें बिना टेंडर के खरीद सकती है। यह भी कहा गया है कि गेहूं का रिजर्व प्राइज को 1 अप्रैल 2023 को संशोधित किया जाएगा जो 31 दिसंबर 2023 तक जारी रहेगा। छोटे व्यापारियों, नैफेड, एनसीसीएफ एवं केंद्रीय भंडार आदि के लिए 10 फरवरी को गेहूं का जो रिजर्व प्राइज नियत की गई है, वह अपरिवर्तिता रहेगी। नया रिजर्व व मूल्य तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

गेहूं व्यापारिक कारोबार में मंदी

एकंदर में इस नीति से गेहूं का व्यापारिक कारोबार जो आटा मैदा मिलों से होता था, वह तो लगभग समाप्त हो गया है। केवल शरबती, लोकवन जिन्हें विशेष तौर पर चाहिए, इन पर व्यापार सीमिट कर रह जाएगा। वार्षिक स्टॉक करने वाले परिवार मिल से उच्च क्वालिटी के गेहूं का उपयोग करते हैं, उनकी मांग जरूर बनी रहेगी। लोकवन के भावों पर थोड़ा बहुत मंदी का असर पड़ेगा। संयोगितागंज मंडी गेट के बाहर 400 से 500 बोरी गेहूं की आवक रही। लोकवन गेहूं 2500 से 2550 रुपए बिका।

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