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किसानो को जेविक खेती के लिए दी रही भारी सब्सिडी, सरकार ने शुरू की पारंपरिक कृषि विकास योजना

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आज किस एक बार फिर से परंपरागत खेती और जैविक खेती करते हुए नजर आ रहे हैं, जैविक खेती पूरी तरह से जैविक खाद पर निर्भर होती है और इसमें किसी तरह का रासायनिक खाद इस्तेमाल नहीं किया जाता है। दुनिया के लिए भले ही आज यह नयी तकनीक को लेकिन परंपरागत रूप से देश में जैविक खाद पर आधारित खेती काफी लंबे समय से होती आ रही थी, देश में जैविक खाद के प्रयोग की भी परंपरा रही है।

पारंपरिक कृषि विकास योजना

जैविक खेती से खेतो में नाइट्रेट के निश्चलन को भी कम करती है, इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार भी अब इसमें और कदम बढ़ाते हुए नजर आ रही है और किसानों को प्रोत्साहित करते हुए देखी जा सकती है, जिसके लिए सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना की भी शुरुआत की है। परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से किसानों को जैविक खेती करने के लिए भी आर्थिक सहायता मुहैया करा रही है।

50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

इस योजना में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान दोनों का उपयोग जैविक खेती के लिए किया जाता है। सरकार इसके लिए देश के किसानों को आर्थिक मदद भी देगी। आपको बता दे की, सरकार किसानों को जैविक खेती करने के लिए 3 साल तक कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। जिसमें जैविक कीटनाशक, जैविक खाद एवं बीज के लिए 31000 रुपये प्रति हेक्टेयर है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

योजना का उद्देश्य देश के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि मिट्टी की उर्वरकता और बढाया जा सके । इससे किसान भाइयों को अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी के लिए किसी भी प्रकार के रसायन और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना पड़ेग, साथ ही उत्पादन भी काफी अच्छा होने की उम्मीदे रहती है। इससे प्राप्त खेती स्वस्थ और पौष्टिक होगी। इस योजना से किसानों की आय भी बढ़ेगी और वे जैविक खेती के बारे में अधिक जानकारी भी किसानो तक पहुचेगी।

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