सरकार पारंपरिक किस्मों को बढ़ावा देने के लिए बीजों पर दे रही 80 प्रतिशत तक सब्सिडी, इन फसलो को किया शामिल

इस समय सरकार किसानो को पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बीजों पर 80% तक सब्सिडी प्रदान करने की योजना बना रही है। आपको बताते कि, बिहार सरकार ने यह कदम बढ़ाया है और खेती को बढ़ावा देने के लिए एक पहल शुरू की है, जिसके तहत निजी सार्वजनिक सहायता मोड कहा गया है। इसके तहत किसानों को कम पानी और सूखे की स्थिति में भी मोटे अनाज की फसल को उगाने के लिए 80 प्रतिशत तक बीजों पर सब्सिडी प्रदान करने की योजना बनाई गई है।

10 कृषि विज्ञान केंद्र को जिम्मेदारी

बिहार सरकार द्वारा मोटे अनाज के बीच उत्पादन के लिए 10 कृषि विज्ञान केंद्र की जिम्मेदारियां दी गई। किसानों से पीपीपी मोड पर खेती कराने की पहल होगी। इसके लिए केवीके में किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार किसानों को मिट्टी की प्रकृति के अनुकूल खेती के लिए प्रेरित करेगी।

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इसके लिए कृषि विभाग एफपीओ  और बीज उत्पादक कंपनियों की सहायता ली जाएगी। जिसके लिए उन्नत बीज उत्पादन के लिए कृषि विशेषज्ञ इस पर कार्य करेंगे। यहा आपको बता दे कि मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, चना, कुटकी, कौनी, सावां और कोदो आदि शामिल किया हैं, जिसके लिए उन्हें सब्सिडी दी जाएगी।

उन्नत बीज के लिए स्थापित होगें सेंटर

सरकार इसके लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। इसके अंतर्गत उन्नत बीज उत्पादन के लिए कृषि विशेषज्ञों द्वारा कार्य किया जाएगा। जिससे पानी की कमी व सूखे की स्थिति में भी मोटे अनाज की फसल को उगाया जा सकेगा।

50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी

इस योजना के तहत बिहार में कृषि विभाग किसानों को बीज पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करेगा। वही किसानों के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण बीज का उत्पादन किया जाएगा। इसके बाद ज्वार, बाजरा और मडुआ आदि के बीज किसानों में वितरित किए जाएंगे ताकि वह इनका उपयोग करके अपनी खेती आसानी से कर सके। वहीं, प्रदेश में मोटे अनाज की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा और इसके लिए प्रचार प्रसार भी किया जाने वाला है। इस समय बिहार के गया जिले में सेंटर आफ एक्सीलेंस तैयार किया जा रहा है, जहा किसानों को आगे चलकर इसका लाभ भी प्रदान किया जाएगा।

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