आगामी महीनों में भारत में गेहूं का आयात शुरू होने की बढ़ रही है संभावना

भारत में आगामी महीनों के दौरान गेहूं का आयात शुरू होने की संभावना बढ़ रही है। यदयपि चीन के बाद भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक एवं खेपतकर्ता देश है, लेकिन चीन के विपरीत भारत गेहूं के मामले में न आत्मनिर्भर बना हुआ है. बल्कि अधिशेष स्टॉक का निर्यात भी करता रहा है।

इस बार परिस्थितियां भिन्न कुछ नजर आ रही है। दिल्ली एक तो केन्द्रीय पूल में स्टॉक घटकर काफी नीचे गेहूं का आ गया है और चालू रबी सीजन में इस के उत्पादन महत्वपूर्ण खाद्यान्न की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है जबकि आगामी समय में अलनीनो मौसम चक्र के आगमन की आशंका बनी हुई है जिससे दक्षिण पश्चिम मानसून की बारिश प्रभावित हो सकती है और खरीफ कालीन खाद्यान्न के उत्पादन में गिरावट आ सकती है।

भारत में कितना होगा गेहूं का आयात

व्यापार विश्लेषकों स्टॉक बढ़ाने के लिए सरकार को के अनुसार कम से कम 340 लाख टन गेहूं की खरीद की आवश्यकता पड़ेगा ताकि विभिन्न योजनाओं की करने में आसानी जरूरतों हो। स्टॉक कम है। सरकार ने 341.50 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन यह हासिल हो पाएगा या नहीं- यह बताना अभी कठिन है।

सिंगापुर में आयोजित कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने कहा कि कल्याणकारी को पूरा सरकारी 2022-23 केसीजन में देश में गेहूं का उत्पादन लगभग सामान्य रहे सकता है जबकि इसकी घरेलू मांग एवं खपत बढ़कर 1040 लाख टन तक उम्मीद है। कुछ पहुंचने की विश्लेषकों ने कहा था कि भारत 2023-24 के मार्केटिंग सीजन में गेहूं का एक आयातक देश बन सकेता है क्योंकि इसका बाजार भाव काफी ऊंचा चल रहा है। लेकिन अब इसकी संभावना घट गई है।

गेहूं का दाम अधिकांश प्रमुख उत्पादक घटाकर मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास आ गया है। लेकिन इस मूल्य स्तर पर बाजार का टिकना इस बात पर निर्भर करेगा कि गेहूं का उत्पादन कैसा रहता है।

आयात की संभावना

सरकार को अपेक्षित भारी मात्रा इसकी खरीद करने कठिनाई हो सकती है। सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत केन्द्रीय पूल में 50 लाख टन गेहूं उतारने की घोषणा कर चुकी है. जिसमें से 45 लाख टन का स्टॉक फ्लोर मिलर्स, व्यापारियों, बल्क खरीदारों एवं खाद्य पदार्थों के निर्माताओं को उपलब्ध करवाया जा रहा है।

गेहूं का आयात
गेहूं का आयात

इससे सरकारी स्टॉक और भी घट जाएगा। गेहूं की फसल पर खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से देश में गेहूं का आयात नहीं या नगण्य हो रही हैं लेकिन यदि आगे परिस्थितियां प्रतिकूल हुई तो आयात की संभावना बढ़ सकती है।

2023 में गेहूं उत्पादन का पूर्वानुमान

गेहूं फसल की निगरानी के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा गठित समिति की एक बैठक हाल ही में भारतीय गेहं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल में हुई जिसमें कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मौसम विभाग के विशेषज्ञों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पदाधिकरियों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों, प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधियों एवं प्रांतीय सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस बैठक में गेहूं फसल की मौजूदा स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया गया और खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में इसकी हालत पर विस्तार से चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि इन पांच राज्यों द्वारा केन्द्रीय पूल में 90 प्रतिशत से अधिक गेहूं का योगदान दिया जाता है। वहां गेहूं का बिजाई क्षेत्र भी 85 प्रतिशत से अधिक रहता है।

गर्मी का भी गेहूं की फसल पर प्रभाव

गेहूं समिति ने माना कि चालू रबी सीजन में अब तक सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं की स्थिति में राज्य फसल सामान्य है। कृषि एवं आईसीएआर तथा विश्वविद्यालयों के गंभीर सघन प्रयासों के कारण बड़ी संख्या में गर्मी को बर्दाश्त करने वाली प्रजातियों का विकास संभव हो पाया है और इस बार गेहूं की इनकिस्मों की खेती भी बड़े पैमाने पर हुई है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के मैदानी इलाकों में करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र में इन नई प्रजातियों के गेहूं की बिजाई की गई है। इसके अलावा हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्रफल में गेहूं की या तो अगैती बिजाई हुई है या आदर्श समय के अंदर बिजाई पूरी हो गई। इस क्षेत्र में मार्च की गर्मी का भी गेहूं की फसल पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पडेगा।

कृषि एडवाइजरी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) अब हैदराबाद के एक संस्थान के सहयोग से प्रत्येक सप्ताह मंगलवार एवं गुरुवार को कृषि एडवाइजरी जारी कर रहा है।

एडवायजरी जिला कृषि मौसम इकाइयों के माध्यम से जारी की जा रही है। इसके साथ-साथ समूचे देश में अवस्थित कृषि केन्द्र विज्ञान केन्द्र एवं करनाल स्थित भारतीय गेहूं तथा जौ अनुसंधान संस्थान द्वारी भी किसानों को आवश्यक जानकारी एवं सलाह दी जा रही है।

चूंकि सरकार इस बार पहले से ही सजग-सतर्क है इसलिए गेहूं की फसल को प्रतिकूल मौसम प्रकोप से बचने का हर संभव के प्रयास कर रही है। कृषि मंत्रालय का फसल मौसम निगरानी ग्रुप इस दिशा में सक्रिय है और फसल की हालत पर नजर रखने के लिए प्रत्येक सप्ताह उसकी बैठक भी हो रही है। इसमें सम्बन्धित मंत्रालयों एवं विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।

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